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लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° – à¤à¤• आम बीमारी या दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लिठà¤à¤• बà¥à¤¤à¤¾ हà¥à¤† खतरा
हमारे शरीर में पलने वाले कईं à¤à¤¸à¥‡ रोग हैं जिनको हम ये सोच के नज़र अंदाज़ कर देते हैं के ये आम बीमारी है। à¤à¤¸à¥€ ही à¤à¤• बीमारी है लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°/ निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ªà¥¤
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को हलà¥à¤•े में मत लें। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° हद से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कम होने पर ऑरà¥à¤—न फेलियर से लेकर दिल का दौरा पड़ने जैसी खतरनाक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ पैदा हो सकती है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में बहà¥à¤¤ बड़ी तादाद में लोग लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ से पीड़ित हैं। ये बीमारी इतनी आम लगती है के अकà¥à¤¸à¤° इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में किसीको नहीं पता चलता है और इसे कोई और शारीरिक बदलाव से या आम चीज़ों से जोड़ लेते हैं। ये उनकी सिरà¥à¤« हेलà¥à¤¥ ही नहीं ज़िनà¥à¤¦à¤—ी को à¤à¥€ खतरे में डाल सकता है।
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° या निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कà¥à¤¯à¤¾ है?
इससे कà¤à¥€-कà¤à¥€ आप थका हà¥à¤† या चकà¥à¤•र आना महसूस कर सकते है। किसी à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के रकà¥à¤¤ चाप की सामानà¥à¤¯ मातà¥à¤°à¤¾ 120/80 होना चाहिà¤à¥¤ जब किसी à¤à¥€ इंसान का बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 90/60 से नीचे चला जाता है, तो इस अवसà¥à¤¥à¤¾ को लो बीपी या हाइपोटेंशन कहते है।
कà¤à¥€ किसीकी बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की रीडिंग अगर इस साधारण मातà¥à¤°à¤¾ से कम हो जाये तो उसे लौ बीपी की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में गिना जाता है। ये कोई à¤à¥€ इंसान को किसी à¤à¥€ कारण से हो सकते हैं जैसे शरीर में पानी की कमी, दवाई का असर, सरà¥à¤œà¤°à¥€ या गंà¤à¥€à¤° चोट, आनà¥à¤µà¤‚शिक या जेनेटिक, सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ लेना, डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ का सेवन, खान पान की बà¥à¤°à¥€ आदतें, जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक à¤à¥‚खा रहना या अनियमित खान पान आदि।
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के पà¥à¤°à¤•ार?
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के कारणों और कारकों के आधार पर कà¥à¤› शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में तोड़ कर विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ किया जा सकता हैं:
1.ऑरà¥à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤•, या पोसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤² हाइपोटेंशन – ऑरà¥à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• हाइपोटेंशन के वजह से जब आप बैठने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से खड़े होते हैं तो गà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ पैरों में खून जमा देती हैं और रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª में अचानक गिरावट होती हैं। ऑरà¥à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤• हाइपोटेंशन विशेष रूप से बà¥à¥›à¥à¤°à¥à¤—ों में आम है, लेकिन यह यà¥à¤µà¤¾ को à¤à¥€ पà¥à¤°
à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है जो सेडेंटरी जीवनशैली का पालन करते हैं या सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ लोग जो अपने पैरों को लंबे समय तक पार करने के बाद या à¤à¤• समय के लिठबैठने के बाद अचानक उठखड़े होते हैं।
2.पोसà¥à¤Ÿà¤ªà¥à¤°à¤¾à¤‚डियल हाइपोटेंशन – खाने के बाद रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª में यह अचानक गिरावट जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° बà¥à¥›à¥à¤°à¥à¤—ों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। आपके खाने के बाद रकà¥à¤¤ आपके पाचन तंतà¥à¤° में पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ होता है। सामानà¥à¤¯ रूप से, आपका शरीर आपकी हृदय का गति बढ़ाता है और रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के सामानà¥à¤¯ मातà¥à¤°à¤¾ को बनाठरखने में मदद करने के लिठकà¥à¤› रकà¥à¤¤ वाहिकाओं को संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ करता है।
3.नेउरेली मेडिà¤à¤Ÿà¥‡à¤¡ हाइपोटेंशन – ये निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª विकार हृदय और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के बीच गलत संचार के कारण होता है।
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के लकà¥à¤·à¤£
कईं बार, कà¥à¤› रोगी के शरीर में, निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª à¤à¤• अंदरूनी समसà¥à¤¯à¤¾ का à¤à¥€ संकेत देता है, खासकर जब ये अचानक कम हो जाये। लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के साधारण संकेत और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से हैं:
â—चकà¥à¤•र आना या सर घूमना
â—उलà¥à¤Ÿà¥€ जैसा होना, मितली होना या जी मिचलाना
â—बेहोशी (सिंकोप)
â—थकान या शरीर à¤à¤¾à¤°à¥€ लगना
â—धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ लगाने में परेशानी होना
â—आंखों के सामने अंधेरा छाना, धà¥à¤‚धला दिखाई देना
â—हाथ-पैर ठंडे होना
â—चेहरा सफेद पड़ना
â—सांस लेने में दिकà¥à¤•त होना
â—खाने में परेशानी होना
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• परिणाम
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शरीर के अंगों में सही तरह से खून की सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ नहीं होती है जिस से सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤•, हारà¥à¤Ÿ अटैक और किडनी फेलियर तक होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है। आम ज़िनà¥à¤¦à¤—ी में, बीपी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कम होने पर रोगी बेहोश हो सकता है, सचेतन नहीं रहने पे उस इंसान के सिर में गंà¤à¥€à¤° चोट आ सकती है। à¤à¤¸à¥‡ कई मामलों में बà¥à¤°à¥‡à¤¨ हैमरेज होने के केस à¤à¥€ सामने आ चà¥à¤•े हैं।
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• हाइपोटेंशन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में परिणाम जान की जोखिम à¤à¥€ हो सकते हैं जिसमें सबसे आम चीज़ो में शामिल हैं:
1.à¤à¥à¤°à¤® होना, विशेष कर वृदà¥à¤§ लोगों में – इस बात को कईं लोग उमà¥à¤° के साथ जोड़के नज़र अंडा à¤à¥€ कर देतें हैं
2.ठंडा ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लगना, निरंतर बार बार शरà¥à¤¦à¥€ होना
3.चिपचिपापन, पीला तà¥à¤µà¤šà¤¾
4.तीवà¥à¤°, उथली शà¥à¤µà¤¾à¤¸
5.कमजोर और तेज नाड़ी-सà¥à¤ªà¤‚दन/पलà¥à¤¸
लो बी.पी. के कारण
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° (हाइपोटेंशन) किसी को à¤à¥€ हो सकता है, हालांकि कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार के निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª आपकी उमà¥à¤° या अनà¥à¤¯ कारणों के आधार पर होते हैं:
उमà¥à¤°
खड़े होने पर या खाने के बाद रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª में गिरावट मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से ६५ वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के वयसà¥à¤•ों में होती है। आम तौर पर नेउरेली मेडिà¤à¤Ÿà¥‡à¤¡ हाइपोटेंशन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और छोटे वयसà¥à¤•ों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है।
दवाइयां
जो लोग कà¥à¤› विशेष रोग या बिमारियों के दवाइयां लेते हैं, उदाहरण के लिà¤, हाइ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° वाली दवाइयां लेने से लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° हो जाने का खतरा होता है।
बीमारियाà¤
पारà¥à¤•िंसंस रोग, मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ और कà¥à¤› दिल की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने आपको निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के विकास के अधिक जोखिम में डाल दिया।
शारीरिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी, हृद रोग, à¤à¤‚डोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥à¤²à¥‡à¤®à¥à¤¸, डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, दसà¥à¤¤, संकà¥à¤°à¤®à¤£, बà¥à¤²à¤¡ लॉस/खून की कमी, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, डाइट की समसà¥à¤¯à¤¾ आदि।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° का सलाह कब लेना हैं
ऊपर लिखे हà¥à¤ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में अगर आपको कोई à¤à¥€ संकेत मिलता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से ज़रूर बात करें और आपातकालीन सहायता लें।
अगर आपके बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की रीडिंग लगातार कम है, लेकिन ठीक महसूस हो रहा है, तो आपका डॉकà¥à¤Ÿà¤° से नियमित सलाह और परिकà¥à¤·à¤£ करते रहना चाहिà¤à¥¤
लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के मदद से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें के आपका बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और कब लौ होता है। यह आपके सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ का रिकॉरà¥à¤¡ रखने में मददगार हो सकता है।
डाइटॠऔर लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² में कà¥à¤¯à¤¾ बदलाव ज़रूरी है !
लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का कोई निरà¥à¤®à¥‚ल उपचार नहीं है। मगर लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को सही डाइट और बचाव के ज़रिये नियंतà¥à¤°à¤£ किया जा सकता हैं:
â—खाने में नमक की मातà¥à¤°à¤¾ सामानà¥à¤¯ रखें। शरीर के बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को सामानà¥à¤¯ रखने में नमक अहम à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है।
â—दिनà¤à¤° में कम से कम ८ गà¥à¤²à¤¾à¤¸ पानी या किसी अनà¥à¤¯ तरह का लिकर पीजिये जैसे की दूध, मटà¥à¤ ा, जूस, लसà¥à¤¸à¥€ आदि, ताकि शरीर हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ बना रहे।
â—à¤à¤• à¤à¤Ÿà¤•े से अचानक नीचे से ऊपर की ओर न उठें।
â—दवाई डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह करने पर ही लें। अगर आपको किसी दवाई से रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ होती हैं तो इससे à¤à¥€ बीपी गड़बड़ हो सकता है।
â—अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मानशिक या शारीरिक सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ लेने से बचें।
â—सिगरेट, शराब या अनà¥à¤¯ कोई नशे का सेवन न करें।
â—खाने में हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और फलों को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शामिल करें।
â—हाई कारà¥à¤¬ वाले खाने से बचाव करें
इसके अलावा à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सरे घरेलॠचीज़ें हैं जो निमà¥à¤¨ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के उपाय दे सकता है। लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° या हाइपोटेंशन के घरेलॠउपचार में मददगार साबित हà¥à¤† है जैसे – बà¥à¤²à¥ˆà¤• कॉफी, जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी पीना, कचà¥à¤šà¥‡ चà¥à¤•ंदर का जूस और बादाम दूध आदि।
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